सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

फ़रवरी, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मै क्या हूं?

ये तीन शब्द, प्रश्नचिन्ह के साथ आपके दिमाग  में कभी न कभी  जरूर आया होगा। सिम्पल सा प्रश्न है पर इसका जवाब देना उतना ही मुश्किल। नाम पहचान के साथ शुरू होने वाला ये जवाब बहुत कुछ बयां करने की हिम्मत रखता है। एकबार्गी जब अपने को बुरे वक़्त में पाया तो इसी जवाब  सहारे  मै किनारे तक लौटा था। कुछ इस तरह मै एक आस हू, उम्मीद हू, अच्छे कल की संभावना हू, पापा का घमंड हू, मा के लिए सभी मुसीबतों का हल हू, छोटी  सबसे अच्छा दोस्त हू, जिगर का बेहतरीन भैया हू, दादी और नानी का दुलारा पोता हू, जिसके लिए वो अपना सबकुछ वारने को तैयार है, मै खुशी हूं अपनों का, मै सिर्फ मै नहीं , मै उम्मीद हू मै आस हू सभी अपनों क पास हू।