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दो नंबर कम है

" सुनेहा और तेरे मार्क्स केमेस्ट्री में कम है  ना  ? " " दो नंबर कम है मेरे पास होने के लिए  "  " वैसे क्लास तू में तो सारे मौखिक सवाल ठीक बताती थी? रंजन सर से बात करके देखो बात बन जाये| सर अच्छे है मदद कर देंगे   " "चौथे पीरियड के घंटी के बाद सर से मिलूंगी  "        ये कहते हुए प्रिया का चेहरा उतर गया था| कितना जिद कर के वो केंद्रीय विद्यालय में एडमिशन के लिए पापा को मनाई थी | ग्यारहवीं के पहले परीक्षा में ही फेल हो गयी यह जानकर तो उसकी पढाई बंद ही कर देंगे | प्रिया 10th तक गाँव के हिंदी मध्यम स्कूल में पढ़ी थी| यहाँ केंद्रीय विद्यालय में पढ़ना उसके लिए किसी सपने के सच होने से काम नहीं था| पर अचानक से  हिंदी से इंग्लिश में पढाई करना उतना आसान नहीं था| प्रिया अपने अंग्रेजी की समस्या के चलते रंजन सर से पहले भी बात कर चुकी थी| कभी कभी रंजन सर उसे अंग्रेजी में हेल्प भी किया करते थ | बार बार उसके जेहन में माँ की तस्वीर उभर रही थी| तड़पती धुप में धान के खेत में काम करते हुए| ...
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मै क्या हूं?

ये तीन शब्द, प्रश्नचिन्ह के साथ आपके दिमाग  में कभी न कभी  जरूर आया होगा। सिम्पल सा प्रश्न है पर इसका जवाब देना उतना ही मुश्किल। नाम पहचान के साथ शुरू होने वाला ये जवाब बहुत कुछ बयां करने की हिम्मत रखता है। एकबार्गी जब अपने को बुरे वक़्त में पाया तो इसी जवाब  सहारे  मै किनारे तक लौटा था। कुछ इस तरह मै एक आस हू, उम्मीद हू, अच्छे कल की संभावना हू, पापा का घमंड हू, मा के लिए सभी मुसीबतों का हल हू, छोटी  सबसे अच्छा दोस्त हू, जिगर का बेहतरीन भैया हू, दादी और नानी का दुलारा पोता हू, जिसके लिए वो अपना सबकुछ वारने को तैयार है, मै खुशी हूं अपनों का, मै सिर्फ मै नहीं , मै उम्मीद हू मै आस हू सभी अपनों क पास हू।